जानकारी
ज़मीन से जुड़े आम सवालों के आसान जवाब — खेसरा, जमाबंदी, सर्वे, दाखिल-खारिज और वंशावली।

खेसरा नंबर से ज़मीन का मालिक कैसे पता करें (बिहार)
खेसरा नंबर से ज़मीन का मालिक बिहार भूमि पोर्टल की जमाबंदी पंजी और भू-नक्शा से पता चलता है — लेकिन सही नतीजा तभ…
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प्रपत्र-2 (स्वघोषणा) नहीं भरने पर क्या होगा?
बिहार विशेष सर्वे में प्रपत्र-2 (स्वघोषणा) न भरने पर आपकी ज़मीन का नया रिकॉर्ड आपकी जानकारी के बिना बन सकता है…
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दाखिल-खारिज में कितना समय लगता है और रिजेक्ट क्यों होता है?
बिहार में दाखिल-खारिज में सामान्यतः कुछ हफ़्तों से कुछ महीनों का समय लगता है — यह अंचल और मामले पर निर्भर करता…
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खतियान और जमाबंदी में क्या अंतर है? (आसान हिंदी)
खतियान पुराने भूमि सर्वे का स्थायी रिकॉर्ड है जो मूल रैयत (अक्सर दादा-परदादा) का नाम दिखाता है, जबकि जमाबंदी व…
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बिहार ज़मीन सर्वे में कौन-कौन से कागज़ लगते हैं? (पूरी लिस्ट)
बिहार विशेष भूमि सर्वे (प्रपत्र-2 स्वघोषणा) के लिए आम तौर पर चाहिए: हर प्लॉट का खाता-खेसरा-रकबा, पुराना खतियान…
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दाखिल-खारिज का स्टेटस ऑनलाइन कैसे चेक करें? (बिहार)
दाखिल-खारिज का स्टेटस बिहार भूमि पोर्टल पर केस नंबर से देखा जाता है — आवेदन लंबित है, स्वीकृत हुआ, या किसी कमी…
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भू-नक्शा में अपना प्लॉट नहीं दिख रहा? कारण और आसान हल
भू-नक्शा में प्लॉट न दिखने के आम कारण हैं — गलत ज़िला/अंचल/मौज़ा का चुनाव, पुराना या बदला हुआ खेसरा नंबर, मौज़…
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LPC कितने दिन में बनता है और कितना खर्च आता है? (बिहार)
बिहार में LPC (भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र) ऑनलाइन आवेदन के बाद सामान्यतः कुछ दिनों से दो-तीन हफ़्तों में बन जाता…
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परिमार्जन और दाखिल-खारिज में क्या अंतर है? (कौन-सा कब)
दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) तब होता है जब ज़मीन खरीद या विरासत के बाद रिकॉर्ड में नया मालिक चढ़ाना हो। परिमार्जन तब…
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