जानकारी
ज़मीन से जुड़े आम सवालों के आसान जवाब — खेसरा, जमाबंदी, सर्वे, दाखिल-खारिज और वंशावली।

गैरमजरूआ ज़मीन क्या है और सर्वे में क्या करें
सर्वे के कागज़ में अपनी ज़मीन के आगे गैरमजरूआ लिखा देखकर बहुत लोग घबरा जाते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि रिकॉर…
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ज़मीन पर कब्ज़ा है पर कागज़ नहीं — सर्वे में क्या करें
बिहार के गाँवों में यह बहुत आम है कि ज़मीन पीढ़ियों से एक ही परिवार जोत रहा है, पर मौजूदा पीढ़ी के नाम कोई काग…
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विधवा और पत्नी का नाम सर्वे और वंशावली में
पति की मृत्यु के बाद अक्सर ज़मीन के कागज़ उन्हीं के नाम रह जाते हैं और परिवार सोचता है कि बाद में देख लेंगे। स…
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भाइयों में बँटवारा नहीं हुआ — सर्वे में ज़मीन कैसे दर्ज हो
बिहार में बहुत बड़ी संख्या में पुश्तैनी ज़मीन आज भी बिना बँटवारे के साझा चल रही है। खेत अलग-अलग जुत रहे हैं, प…
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खानापुरी पर्चा क्या है और उसमें क्या देखना है
खानापुरी के बाद तैयार रिकॉर्ड का जो पर्चा मिलता है, बिहार भूमि की जानकारी के अनुसार वह प्रपत्र-7 में बनता है औ…
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दावा-आपत्ति कैसे करें — सर्वे में गलती सुधरवाने का सही समय
सर्वे का प्रारूप प्रकाशित होने के बाद एक तय अवधि मिलती है जिसमें आप कह सकते हैं कि रिकॉर्ड में यह बात गलत है। …
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अमीन की नाप और आपकी रसीद में फ़र्क हो तो क्या करें
किश्तवार के दिन अक्सर यह होता है कि अमीन की नाप और आपकी रसीद में लिखा रकबा एक जैसा नहीं निकलता। यह हमेशा किसी …
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वंशावली पर सरपंच की मुहर ज़रूरी है या नहीं
बिहार विशेष सर्वे में वंशावली स्वघोषणा के रूप में ली जाती है, यानी आप खुद लिखकर, खुद हस्ताक्षर करके दे सकते है…
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वंशावली में बेटी का नाम लिखें या नहीं
वंशावली में बेटियों का नाम छोड़ देना बहुत आम है, और यही आगे चलकर सबसे बड़े झगड़े की जड़ बनता है। दो हज़ार पाँच…
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खानापुरी और किश्तवार क्या है — सर्वे में आगे क्या होगा
प्रपत्र-2 और वंशावली जमा कर देना सर्वे का अंत नहीं, शुरुआत है। उसके बाद ज़मीन की मौके पर नाप होती है, रिकॉर्ड …
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खेसरा नंबर से ज़मीन का मालिक कैसे पता करें (बिहार)
खेसरा नंबर से ज़मीन का मालिक बिहार भूमि पोर्टल की जमाबंदी पंजी और भू-नक्शा से पता चलता है — लेकिन सही नतीजा तभ…
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प्रपत्र-2 (स्वघोषणा) नहीं भरने पर क्या होगा?
बिहार विशेष सर्वे में प्रपत्र-2 (स्वघोषणा) न भरने पर आपकी ज़मीन का नया रिकॉर्ड आपकी जानकारी के बिना बन सकता है…
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दाखिल-खारिज में कितना समय लगता है और रिजेक्ट क्यों होता है?
बिहार में दाखिल-खारिज में सामान्यतः कुछ हफ़्तों से कुछ महीनों का समय लगता है — यह अंचल और मामले पर निर्भर करता…
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खतियान और जमाबंदी में क्या अंतर है? (आसान हिंदी)
खतियान पुराने भूमि सर्वे का स्थायी रिकॉर्ड है जो मूल रैयत (अक्सर दादा-परदादा) का नाम दिखाता है, जबकि जमाबंदी व…
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बिहार ज़मीन सर्वे में कौन-कौन से कागज़ लगते हैं? (पूरी लिस्ट)
बिहार विशेष भूमि सर्वे (प्रपत्र-2 स्वघोषणा) के लिए आम तौर पर चाहिए: हर प्लॉट का खाता-खेसरा-रकबा, पुराना खतियान…
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दाखिल-खारिज का स्टेटस ऑनलाइन कैसे चेक करें? (बिहार)
दाखिल-खारिज का स्टेटस बिहार भूमि पोर्टल पर केस नंबर से देखा जाता है — आवेदन लंबित है, स्वीकृत हुआ, या किसी कमी…
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भू-नक्शा में अपना प्लॉट नहीं दिख रहा? कारण और आसान हल
भू-नक्शा में प्लॉट न दिखने के आम कारण हैं — गलत ज़िला/अंचल/मौज़ा का चुनाव, पुराना या बदला हुआ खेसरा नंबर, मौज़…
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LPC कितने दिन में बनता है और कितना खर्च आता है? (बिहार)
बिहार में LPC (भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र) ऑनलाइन आवेदन के बाद सामान्यतः कुछ दिनों से दो-तीन हफ़्तों में बन जाता…
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परिमार्जन और दाखिल-खारिज में क्या अंतर है? (कौन-सा कब)
दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) तब होता है जब ज़मीन खरीद या विरासत के बाद रिकॉर्ड में नया मालिक चढ़ाना हो। परिमार्जन तब…
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प्रपत्र 2 कैसे भरें — हर खाना क्या लिखें
प्रपत्र 2 वह कागज़ है जिसमें आप खुद घोषणा करते हैं कि कौन-सी ज़मीन आपकी है और वह आपको कैसे मिली। इसे कोई अधिका…
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प्रपत्र 2 और प्रपत्र 3 में क्या अंतर है
सर्वे के दो कागज़ों को लेकर सबसे ज़्यादा भ्रम रहता है। प्रपत्र 2 में आप बताते हैं कि कौन-सी ज़मीन आपकी है, और …
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प्रपत्र 2 में थाना नंबर, खाता, खेसरा और रकबा कैसे लिखें
प्रपत्र 2 लौटने की सबसे बड़ी वजह कोई बड़ा विवाद नहीं होती, बल्कि यही चार अंक होते हैं। थाना नंबर छूट जाना, खात…
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प्रपत्र 2 कहाँ और कैसे जमा करें
प्रपत्र 2 भर लेना आधा काम है। दूसरा आधा यह है कि वह सही जगह जमा हो और उसका सबूत आपके पास रहे। जमा करने के दो र…
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प्रपत्र 2 में ज़मीन कैसे मिली — विरासत, खरीद या बँटवारा
प्रपत्र 2 का एक छोटा-सा खाना सबसे ज़्यादा आवेदन लौटाता है, वह है ज़मीन कैसे मिली। इसी एक शब्द से तय होता है कि…
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