वंशावली कैसे बनाएं (प्रपत्र-3)
वंशावली आपके परिवार का वंश-वृक्ष है जो मूल खतियानी रैयत (पुरखे) से लेकर आज के वारिसों तक का संबंध दिखाता है। बिहार सर्वे में पुश्तैनी ज़मीन के लिए यह प्रपत्र-3 के रूप में, स्वघोषणा प्रपत्र-2 के साथ जमा की जाती है। इसे आप खुद हस्ताक्षर करके दे सकते हैं।
WhatsApp पर यह काम करवाएंयह क्या है?
वंशावली यानी परिवार का वंश-वृक्ष। ज़मीन सर्वे और बँटवारे में यह साबित करने के लिए ज़रूरी है कि मूल मालिक (दादा/परदादा) के बाद ज़मीन के असली वारिस कौन हैं।
कैसे करें — आसान तरीका
- 1मूल रैयत का नाम लिखेंखतियान में दर्ज मूल मालिक (पुरखे) के नाम से वंशावली शुरू करें।
- 2वंश-वृक्ष बनाएंमूल मालिक के बेटों, फिर उनके बच्चों — इस तरह आज के वारिसों तक का क्रम लिखें।
- 3प्रपत्र-3 फॉर्मेट में भरेंसरकारी प्रपत्र-3(1) के सही फॉर्मेट में सभी नाम और संबंध भरें।
- 4स्वयं प्रमाणित करेंवंशावली पर स्वयं हस्ताक्षर करें — अब इसके लिए सरपंच की मुहर अनिवार्य नहीं है।
- 5प्रपत्र-2 के साथ जमा करेंस्वघोषणा प्रपत्र-2 और ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ इसे जमा करें।
ज़रूरी दस्तावेज़
- ✓मूल मालिक और सभी वारिसों के नाम
- ✓मृत्यु प्रमाण-पत्र (दिवंगत मालिक का) या शपथ-पत्र
- ✓खतियान (हो तो)
- ✓आधार कार्ड
घर बैठे यह काम करवाएं
दस्तावेज़ की फोटो WhatsApp पर भेजिए — बाकी काम हम कर देंगे।
अभी मदद लेंअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या वंशावली के लिए सरपंच की मुहर ज़रूरी है?+
अब नहीं। नए नियम में आप वंशावली स्वयं प्रमाणित करके स्वघोषणा प्रपत्र-2 के साथ जमा कर सकते हैं।
वंशावली कब ज़रूरी है?+
जब ज़मीन पुश्तैनी हो यानी दादा/पिता के नाम हो और उसे वारिसों में बाँटना या सर्वे में दर्ज कराना हो, तब वंशावली ज़रूरी होती है।
क्या आप सही फॉर्मेट में वंशावली बना देते हैं?+
हाँ। आप परिवार के नाम WhatsApp पर भेजिए, हम सही प्रपत्र-3 फॉर्मेट में वंशावली बनाकर PDF भेज देंगे।
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