
जानकारी · ज़मीन सेवा
प्रपत्र-2 (स्वघोषणा) नहीं भरने पर क्या होगा?
बिहार विशेष सर्वे में प्रपत्र-2 (स्वघोषणा) न भरने पर आपकी ज़मीन का नया रिकॉर्ड आपकी जानकारी के बिना बन सकता है — गलत नाम, गलत रकबा, या ज़मीन ‘विवादित’/सरकारी दर्ज हो सकती है, जिसे बाद में सुधारना लंबा और खर्चीला होता है। इसलिए समय रहते स्वघोषणा देना बहुत ज़रूरी है।
यह काम आप खुद कर सकते हैं
इस पेज पर पूरा तरीका दिया है, और सरकारी पोर्टल पर यह निःशुल्क है। हम सिर्फ़ ज़मीन सर्वे के दो कागज़ बनाते हैं — वे तुरंत, बिना इंतज़ार के मिल जाते हैं।
सर्वे और स्वघोषणा क्या है
बिहार में करीब सौ साल बाद विशेष भूमि सर्वेक्षण हो रहा है, जिसमें हर प्लॉट दोबारा मापा जा रहा है और मालिकाना दर्ज किया जा रहा है। हर ज़मीन मालिक को प्रपत्र-2 में अपनी ज़मीन की स्वघोषणा देनी होती है।
न भरने के नुकसान
रिकॉर्ड गलत बन सकता है (नाम/रकबा), ज़मीन विवादित दर्ज हो सकती है, या किसी और के दावे के आधार पर चढ़ सकती है। बाद में सुधार के लिए आपत्ति और लंबी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है।
समय पर क्या करें
अपने हर प्लॉट का खाता-खेसरा-रकबा और पुराने कागज़ (खतियान, रसीद, केवाला) तैयार रखें, प्रपत्र-2 भरें, पुश्तैनी ज़मीन के लिए वंशावली जोड़ें, और dlrs.bihar.gov.in पर या गाँव के सर्वे शिविर में जमा करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या स्वघोषणा देना अनिवार्य है?+
व्यावहारिक रूप से हाँ — समय पर न देने पर आपका रिकॉर्ड गलत या विवादित बन सकता है।
क्या यह घर बैठे हो सकता है?+
हाँ। प्रपत्र-2 और वंशावली दोनों इसी साइट पर बन जाते हैं — भरना और पूरी जाँच मुफ़्त है, और जाँच बता देती है कि कोई ऐसी कमी तो नहीं जिससे शिविर में कागज़ लौट जाए। जमा आपको खुद सर्वे शिविर में या dlrs.bihar.gov.in पर करना होता है।
संबंधित सेवाएं
⚠️ ज़मीन सेवा एक निजी सहायता सेवा है। यह कोई सरकारी वेबसाइट नहीं है और किसी सरकारी विभाग से संबंधित नहीं है। सरकारी पोर्टल पर आवेदन निःशुल्क है; हम केवल सेवा/सहायता शुल्क लेते हैं।