बिहार ज़मीन सर्वे में कौन-कौन से कागज़ लगते हैं? (पूरी लिस्ट)
बिहार विशेष भूमि सर्वे (प्रपत्र-2 स्वघोषणा) के लिए आम तौर पर चाहिए: हर प्लॉट का खाता-खेसरा-रकबा, पुराना खतियान, ताज़ा जमाबंदी/मालगुज़ारी रसीद, खरीदी ज़मीन का केवाला, पुश्तैनी ज़मीन के लिए वंशावली (प्रपत्र-3), मालिक के न रहने पर मृत्यु प्रमाण-पत्र, और आधार। विवादित ज़मीन में कोर्ट का आदेश भी।
WhatsApp पर मदद लेंज़रूरी दस्तावेज़ों की लिस्ट
1) हर प्लॉट का खाता, खेसरा और रकबा। 2) पुराना खतियान। 3) ताज़ा जमाबंदी या मालगुज़ारी (लगान) रसीद। 4) खरीदी ज़मीन का केवाला/रजिस्ट्री। 5) पुश्तैनी ज़मीन के लिए वंशावली (प्रपत्र-3)। 6) मालिक के न रहने पर मृत्यु प्रमाण-पत्र। 7) आधार कार्ड। 8) विवाद हो तो कोर्ट का आदेश।
प्रपत्र-2 और प्रपत्र-3 क्या हैं
प्रपत्र-2 आपकी ज़मीन की ‘स्वघोषणा’ है — आप खुद घोषणा करते हैं कि कौन-सी ज़मीन आपकी है। प्रपत्र-3 (वंशावली) पुश्तैनी ज़मीन के लिए परिवार का वंश-वृक्ष है। दोनों साथ में जमा होते हैं।
कागज़ न हों तो क्या करें
अगर खतियान या जमाबंदी नहीं है तो उसे पहले biharbhumi.bihar.gov.in से ऑनलाइन निकालें। वंशावली खुद बनाकर हस्ताक्षर कर सकते हैं (सरपंच की मुहर अनिवार्य नहीं)। थोड़ी कमी होने पर भी समय पर स्वघोषणा देना बेहतर है।
जमा कहाँ करें
भरे हुए प्रपत्र-2 और वंशावली को dlrs.bihar.gov.in पर ऑनलाइन अपलोड करें या गाँव में लगे सर्वे शिविर (कैंप) में जमा करें। जमा की रसीद/पावती ज़रूर रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या वंशावली हर किसी को चाहिए?+
पुश्तैनी (विरासत वाली) ज़मीन के लिए हाँ। सीधे खरीदी ज़मीन में केवाला मुख्य है, वंशावली की ज़रूरत कम पड़ती है।
क्या आधार ज़रूरी है?+
पहचान के लिए आधार माँगा जाता है। मोबाइल नंबर भी रखें क्योंकि कई जगह OTP आता है।
क्या यह घर बैठे जमा हो सकता है?+
हाँ। दस्तावेज़ की फोटो WhatsApp पर भेजिए — हम प्रपत्र-2 और वंशावली बनाकर ऑनलाइन जमा करने में मदद करते हैं।
संबंधित सेवाएं
⚠️ ज़मीन सेवा एक निजी सहायता सेवा है। यह कोई सरकारी वेबसाइट नहीं है और किसी सरकारी विभाग से संबंधित नहीं है। सरकारी पोर्टल पर आवेदन निःशुल्क है; हम केवल सेवा/सहायता शुल्क लेते हैं।