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विधवा और पत्नी का नाम सर्वे और वंशावली में

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विधवा और पत्नी का नाम सर्वे और वंशावली में

पति की मृत्यु के बाद अक्सर ज़मीन के कागज़ उन्हीं के नाम रह जाते हैं और परिवार सोचता है कि बाद में देख लेंगे। सर्वे इसी बात को ठीक करने का मौका है। विधवा पत्नी वारिसों में गिनी जाती हैं, और वंशावली तथा प्रपत्र-2 में उनका नाम आना चाहिए। नाम छूट जाने पर आगे बँटवारे, बिक्री और दाखिल-खारिज तीनों में दिक्कत आती है।

यह काम आप खुद कर सकते हैं

इस पेज पर पूरा तरीका दिया है, और सरकारी पोर्टल पर यह निःशुल्क है। हम सिर्फ़ ज़मीन सर्वे के दो कागज़ बनाते हैं — वे तुरंत, बिना इंतज़ार के मिल जाते हैं।

वंशावली में नाम कहाँ आएगा

वंशावली में मूल पुरुष से चलकर उनकी संतान और फिर आगे की पीढ़ी आती है। जिस सदस्य की मृत्यु हो चुकी है उनके नाम के आगे यह दर्ज होता है, और उनकी पत्नी का नाम भी वारिस के रूप में लिखा जाता है। साथ में मृत्यु प्रमाण-पत्र लगाना पड़ता है, इसलिए वह पहले से बनवा लेना अच्छा रहता है।

प्रपत्र-2 किसके नाम से भरा जाए

अगर ज़मीन अब भी दिवंगत पति के नाम दर्ज है, तो स्वघोषणा में यह साफ़ लिखिए कि मूल रैयत कौन थे और अब वारिस कौन-कौन हैं। जानकारी छिपाकर सीधे अपने नाम लिख देना ठीक नहीं, क्योंकि रिकॉर्ड से मिलान न होने पर वही आपत्ति की वजह बनता है। सच्ची और पूरी जानकारी सबसे मज़बूत रास्ता है।

बेटियों का नाम भी उसी सूची में

यह सवाल यहीं साथ आता है। वारिसों की सूची में बेटियाँ भी आती हैं। बहुत परिवार सिर्फ़ बेटों के नाम लिखवाकर सोचते हैं कि मामला सरल रहेगा, पर होता उल्टा है। बाद में आपत्ति आने पर पूरा कागज़ दोबारा बनवाना पड़ता है, और तब तक सर्वे आगे बढ़ चुका होता है।

अगर परिवार में सहमति नहीं है

वंशावली किसी का हिस्सा तय नहीं करती, वह सिर्फ़ बताती है कि परिवार में कौन-कौन है। इसलिए नाम लिखने में देर मत कीजिए, भले ही हिस्से पर बात बाक़ी हो। हिस्सा तय करने की प्रक्रिया अलग है और उसे बाद में शांति से किया जा सकता है, पर सर्वे की तारीख़ रुकती नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पति की मृत्यु हो गई, ज़मीन उनके नाम है, अब क्या करें?+

मृत्यु प्रमाण-पत्र लीजिए, वंशावली बनाइए जिसमें वारिस दर्ज हों, और प्रपत्र-2 में पूरी सच्ची जानकारी भरिए।

क्या पत्नी अकेले प्रपत्र-2 दे सकती हैं?+

हाँ, वारिस के रूप में जानकारी दी जा सकती है। बाकी वारिसों के नाम भी दर्ज होने चाहिए ताकि रिकॉर्ड पूरा रहे।

मृत्यु प्रमाण-पत्र नहीं है तो?+

पंचायत या नगर निकाय से बनवाइए। सर्वे में मृत सदस्यों के लिए यह अक्सर माँगा जाता है, इसलिए पहले से तैयार रखना बेहतर है।

वंशावली में मृत सदस्य कैसे दर्ज करें?+

टूल में उस सदस्य पर “जीवित नहीं” चुन दीजिए। जाँच में यह भी बता दिया जाता है कि किन-किन का मृत्यु प्रमाण-पत्र लगाना है।

संबंधित सेवाएं

⚠️ ज़मीन सेवा एक निजी सहायता सेवा है। यह कोई सरकारी वेबसाइट नहीं है और किसी सरकारी विभाग से संबंधित नहीं है। सरकारी पोर्टल पर आवेदन निःशुल्क है; हम केवल सेवा/सहायता शुल्क लेते हैं।

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