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प्रपत्र 2 में थाना नंबर, खाता, खेसरा और रकबा कैसे लिखें
प्रपत्र 2 लौटने की सबसे बड़ी वजह कोई बड़ा विवाद नहीं होती, बल्कि यही चार अंक होते हैं। थाना नंबर छूट जाना, खाता और खेसरा आपस में बदल जाना, या रकबा रसीद से अलग लिख देना। ये चारों कागज़ से मिलाकर लिखे जाएँ तो आधी दिक्कत वहीं खत्म हो जाती है।
यह काम आप खुद कर सकते हैं
इस पेज पर पूरा तरीका दिया है, और सरकारी पोर्टल पर यह निःशुल्क है। हम सिर्फ़ ज़मीन सर्वे के दो कागज़ बनाते हैं — वे तुरंत, बिना इंतज़ार के मिल जाते हैं।
थाना नंबर कहाँ से लें
थाना नंबर वह अंक है जो मौज़ा की पहचान करता है, और यह खतियान या जमाबंदी के ऊपरी हिस्से में लिखा रहता है। यह पुलिस थाने का नंबर नहीं है, इसी भ्रम में बहुत लोग गलत भर देते हैं। लगान रसीद पर भी यह छपा रहता है। कभी-कभी यह 338/1 जैसे रूप में होता है, तो पूरा वैसे ही लिखिए।
खाता और खेसरा का फ़र्क
खाता उस व्यक्ति या परिवार का नंबर है जिसके नाम ज़मीन दर्ज है, और खेसरा ज़मीन के टुकड़े का नंबर है। एक खाते में कई खेसरा हो सकते हैं। इसलिए खाता एक बार और खेसरा हर प्लॉट के लिए अलग लिखा जाता है। दोनों को उलट देना आम गलती है।
रकबा किस इकाई में लिखें
बिहार में रकबा आम तौर पर बीघा, कट्ठा और धुर में लिखा जाता है, कहीं-कहीं एकड़ और डिसमिल में भी। जिस इकाई में आपके कागज़ में दर्ज है उसी में लिखिए और इकाई का नाम साथ लिखिए। बीस धुर का एक कट्ठा और बीस कट्ठा का एक बीघा होता है, इसलिए जोड़ते समय सावधानी रखिए।
मिलान किस कागज़ से करें
सबसे भरोसेमंद क्रम यह है। पहले खतियान देखिए, फिर जमाबंदी, फिर हाल की मालगुज़ारी रसीद। अगर तीनों में रकबा अलग है तो जमाबंदी और रसीद वाला रूप लिखिए, और बाकी कागज़ साथ लगा दीजिए ताकि अंचल खुद मिलान कर सके।
एक जाँच जो पहले कर लीजिए
जमा करने से पहले देख लीजिए कि कोई खेसरा दो बार तो नहीं लिखा गया, कोई प्लॉट छूट तो नहीं रहा, और हर प्लॉट के आगे यह लिखा है या नहीं कि वह कैसे मिली। इस साइट पर प्रपत्र 2 भरते ही यह जाँच अपने आप चल जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
थाना नंबर न मिले तो क्या करें?+
अपने मौज़ा का खतियान या जमाबंदी ऑनलाइन देखिए, वहाँ ऊपर थाना नंबर दर्ज रहता है। पुरानी लगान रसीद पर भी मिल जाता है।
रकबा कागज़ से थोड़ा कम या ज़्यादा हो तो?+
कागज़ वाला रकबा ही लिखिए। नाप में फ़र्क निकलता है तो वह किश्तवार और खानापुरी के समय सामने आता है, और उसके लिए दावा-आपत्ति का अलग चरण होता है।
एक खेसरा में कई हिस्सेदार हों तो?+
अपने हिस्से का रकबा लिखिए और बँटवारे का कागज़ हो तो साथ लगाइए। पूरा खेसरा अपने नाम लिख देना बाद में आपत्ति का कारण बनता है।
संबंधित सेवाएं
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