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प्रपत्र 2 और प्रपत्र 3 में क्या अंतर है

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प्रपत्र 2 और प्रपत्र 3 में क्या अंतर है

सर्वे के दो कागज़ों को लेकर सबसे ज़्यादा भ्रम रहता है। प्रपत्र 2 में आप बताते हैं कि कौन-सी ज़मीन आपकी है, और प्रपत्र 3 में आप बताते हैं कि आप उस परिवार के कौन हैं जिससे यह ज़मीन चली आ रही है। पहला ज़मीन का कागज़ है, दूसरा परिवार का।

यह काम आप खुद कर सकते हैं

इस पेज पर पूरा तरीका दिया है, और सरकारी पोर्टल पर यह निःशुल्क है। हम सिर्फ़ ज़मीन सर्वे के दो कागज़ बनाते हैं — वे तुरंत, बिना इंतज़ार के मिल जाते हैं।

प्रपत्र 2 क्या है

यह स्वघोषणा है। इसमें खाता, खेसरा, रकबा और यह लिखा जाता है कि ज़मीन आपको कैसे मिली। यह हर उस व्यक्ति को देना होता है जिसकी ज़मीन सर्वे में आ रही है, चाहे ज़मीन खरीदी हो या पुश्तैनी।

प्रपत्र 3 क्या है

यह वंशावली है, यानी परिवार का पेड़। इसमें मूल पुरुष से लेकर आज तक के वारिसों के नाम क्रम से लिखे जाते हैं। इसकी ज़रूरत तब पड़ती है जब ज़मीन विरासत से मिली हो, क्योंकि अंचल को यह देखना होता है कि खतियान में दर्ज व्यक्ति से आपका क्या रिश्ता है।

दोनों साथ क्यों जाते हैं

अगर आपने प्रपत्र 2 में कहीं भी विरासत लिखा है तो अकेला प्रपत्र 2 अधूरा माना जाएगा, क्योंकि उसमें यह साबित नहीं होता कि आप वारिस हैं। इसीलिए अधिकतर परिवारों को दोनों कागज़ साथ लगाने पड़ते हैं। सिर्फ़ खरीदी हुई ज़मीन हो तो केवाला से काम चल जाता है।

किसमें क्या गलती होती है

प्रपत्र 2 में सबसे आम गलती रकबा और थाना नंबर की होती है। प्रपत्र 3 में सबसे आम गलती यह है कि आवेदक अपना ही नाम पेड़ में लिखना भूल जाता है, या बेटियों और स्वर्गीय सदस्यों का ज़िक्र नहीं करता। दोनों कागज़ इसी साइट पर बनते हैं और दोनों की जाँच मुफ़्त है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या दोनों कागज़ हर किसी को देने होते हैं?+

प्रपत्र 2 सबको देना होता है। प्रपत्र 3 यानी वंशावली तब चाहिए जब ज़मीन विरासत या बँटवारे से मिली हो।

क्या वंशावली पर सरपंच की मुहर ज़रूरी है?+

स्वघोषित वंशावली मान्य है और सर्वे के लिए आम तौर पर मुहर की माँग नहीं होती। विवाद की आशंका हो तो गवाही रखना बेहतर रहता है।

प्रपत्र 3 और प्रपत्र 3(1) एक ही हैं?+

व्यवहार में लोग वंशावली वाले प्रपत्र को दोनों नामों से लिखते हैं। ज़रूरी यह है कि उसमें वंश-क्रम साफ़ दिखे और आवेदक उसमें मौजूद हो।

संबंधित सेवाएं

⚠️ ज़मीन सेवा एक निजी सहायता सेवा है। यह कोई सरकारी वेबसाइट नहीं है और किसी सरकारी विभाग से संबंधित नहीं है। सरकारी पोर्टल पर आवेदन निःशुल्क है; हम केवल सेवा/सहायता शुल्क लेते हैं।

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