
जानकारी · ज़मीन सेवा
खानापुरी पर्चा क्या है और उसमें क्या देखना है
खानापुरी के बाद तैयार रिकॉर्ड का जो पर्चा मिलता है, बिहार भूमि की जानकारी के अनुसार वह प्रपत्र-7 में बनता है और इसी को लोग खानापुरी पर्चा कहते हैं। यही पहला कागज़ है जिससे आपको पता चलता है कि सर्वे में आपका नाम और आपकी ज़मीन कैसी चढ़ी है। इसे देखे बिना छोड़ देना सबसे महँगी गलती है, क्योंकि आगे यही खतियान बन जाता है।
यह काम आप खुद कर सकते हैं
इस पेज पर पूरा तरीका दिया है, और सरकारी पोर्टल पर यह निःशुल्क है। हम सिर्फ़ ज़मीन सर्वे के दो कागज़ बनाते हैं — वे तुरंत, बिना इंतज़ार के मिल जाते हैं।
यह पर्चा क्यों इतना ज़रूरी है
यह सिर्फ़ रसीद नहीं है, यह आपके नए रिकॉर्ड का पहला रूप है। इसमें जो नाम, खाता, खेसरा और रकबा चढ़ा है, वही आगे चलकर नया खतियान बनेगा। अभी गलती दिख जाए तो दावा-आपत्ति में मुफ़्त सुधर सकती है। बाद में वही सुधार परिमार्जन, अंचल के चक्कर या मुकदमे का लंबा रास्ता बन जाता है।
पर्चा मिलेगा कहाँ
पर्चा सर्वे शिविर से मिलता है, और बिहार सर्वे के ऑनलाइन पोर्टल पर अपने ज़िला, अंचल और मौज़ा चुनकर भी देखा जा सकता है। जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है वे शिविर या अपने अमीन से प्रति माँग सकते हैं। एक प्रति सँभालकर ज़रूर रखिए, आपत्ति के समय यही आपका आधार बनेगी।
पर्चा हाथ में आते ही ये पाँच बातें मिलाइए
पहला, आपका नाम और पिता का नाम वैसा ही है जैसा आधार और जमाबंदी में है, वर्तनी सहित। दूसरा, खाता और खेसरा नंबर वही हैं जो आपकी रसीद में हैं। तीसरा, रकबा सही है और इकाई ठीक लिखी है। चौथा, ज़मीन की प्रकृति सही है, यानी धनहर, बासगीत या जो भी असल में है। पाँचवाँ, आपके सारे प्लॉट इसमें आ गए हैं, कोई छूटा तो नहीं।
कुछ गलत दिखे तो घबराइए मत
यही वह चरण है जिसमें सुधार के लिए दावा-आपत्ति का मौका मिलता है। तय समय के अंदर आपत्ति दीजिए और सबूत लगाइए, जैसे पुरानी रसीद, खतियान, केवाला या वंशावली। ध्यान रहे कि आपत्ति की अवधि सीमित होती है, इसलिए पर्चा आते ही देख लेना और तारीख़ पूछ लेना सबसे समझदारी की बात है।
नाम बिल्कुल चढ़ा ही नहीं तो
ऐसा तब होता है जब आपने प्रपत्र-2 समय पर नहीं दिया, या दिया तो पुश्तैनी ज़मीन पर वंशावली साथ नहीं लगी। अभी भी रास्ता है, पर देर मत कीजिए। कागज़ तैयार कीजिए और आपत्ति के साथ जमा कीजिए। प्रपत्र-2 और वंशावली दोनों इसी साइट पर मुफ़्त बन जाते हैं और जाँच भी मुफ़्त है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
खानापुरी पर्चा किस प्रपत्र में बनता है?+
बिहार भूमि की जानकारी के अनुसार खानापुरी पर्चा प्रपत्र-7 में तैयार होता है। लोग इसे आम बोलचाल में खानापुरी पर्चा ही कहते हैं।
क्या यह पर्चा ही खतियान है?+
नहीं, यह उससे पहले का चरण है। इसी के आधार पर आगे नया खतियान बनता है, इसलिए इसमें गलती रह जाना खतियान में गलती रह जाने जैसा है।
पर्चे में नाम गलत छपा है तो?+
दावा-आपत्ति की अवधि में आपत्ति दीजिए और सबूत लगाइए। इस चरण में सुधार सबसे आसान और सबसे सस्ता होता है।
मेरा नाम पर्चे में है ही नहीं?+
प्रपत्र-2 और, पुश्तैनी ज़मीन पर, वंशावली तैयार कीजिए और आपत्ति के साथ जमा कीजिए। दोनों कागज़ इसी साइट पर मुफ़्त बनते हैं।
संबंधित सेवाएं
⚠️ ज़मीन सेवा एक निजी सहायता सेवा है। यह कोई सरकारी वेबसाइट नहीं है और किसी सरकारी विभाग से संबंधित नहीं है। सरकारी पोर्टल पर आवेदन निःशुल्क है; हम केवल सेवा/सहायता शुल्क लेते हैं।